Rahasyamay Kuan 3 Horror Story | New Hindi Horror Stories 2026 | Jary News

Rahasyamay Kuan 3 Horror Story | New Hindi Horror Stories 2026 | Jary News


मुखिया जी आपकी पत्नी ठकुराइन बालकनी से गार्डन में आ गिरी। क्या वोट ठीक तो है? उनको चोट तो नहीं आई है

मुखिया जी लेकिन उनकी आंखों में खौफ नजर आ रहा है और वो कुछ बोल भी नहीं रही हैं। हे भगवान यह सुनकर सभी गांव के लोग और तांत्रिक बाबा जी मुखिया जी के साथ हो लिए।

सभी घर पहुंचे तो ठाकुराइन पलंग पर पड़ी थी। ठाकुरन क्या हुआ आपको? हमें कुछ तो बताइए। मुखिया जी को सामने पाकर ठाकुराइन उनसे लिपट गई। ए जी कुछ देर ठाकुराइन ऐसे ही मुखिया जी के गले लगी रही और फिर हिम्मत करके बोली मुझे बहुत ही भयानक सपना दिखाई दिया

और फिर ऐसा लगा कि कोई मेरा पैर खींच रहा है। मैं अपने आप बालकनी में खींची चली गई और अपने आप को संभालने की कोशिश की तो गार्डन में जा गिरी। उसके बाद मुझे होश ही नहीं रहा कि मैं कहां हूं। यह सुनकर सभी हैरान रह गए। और तांत्रिक बाबा बोले ठाकुर जी क्या आपके घर से आपकी कोई चीज गायब है? इस पर ठाकुर ने सोच कर जवाब दिया। हां हमारा पुश्तैनी निहार गायब है।

कल शाम हमने उसे उतार कर अलमारी में रखा था। लेकिन अब वो कहीं नहीं मिल रहा। यह सुनकर बाबा ने मुखिया जी की तरफ देखा और बोले ठकुराइन का खास ख्याल रखा जाए। लगता है किसी ने कुएं से अपनी ख्वाहिशें मांगी है और उसने ठकुराइन की हार को कुएं में डालकर इनकी जान का सौदा किया है। यह सुनकर सभी लोग डर गए। ठकुराइन के चेहरे पर आया ख्वाब और ज्यादा बढ़ गया और मुखिया जी की आंखों से आंसू निकल पड़े। मैं आपको कुछ नहीं होने दूंगा। ठकुराइन कुछ नहीं होने दूंगा।

अब फिर से गांव में डर का माहौल छा गया था। ठकुराइन की सुरक्षा में मुखिया जी ने कई आदमी लगा दिए थे। रात होने पर सभी अपनेपने घरों में घुस गए थे। मैं भी दादा जी के साथ बरामदे में ही बैठा सोच में डूबा था। रोहन बेटा तुम क्या सोच रहे हो? अब कुछ नहीं दादा जी बस मैं दादा जी को और परेशान नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने उनको नहीं बताया कि मुझे कोई आवाजें सुनाई देती हैं। रात होने पर जब मैं पलंग पर गया तो फिर से मुझे वो आवाज सुनाई दी। रोहन आ जाओ रोहन। मैं तुमको जंगल घुमाऊंगी। इस बार अपने साथ हल्दी की गांठे मत लाना। यह आवाज सुनकर मैं दबे पांव घर से बाहर निकला और जंगल की तरफ रवाना हो गया। वो औरत मुझे नजर आई

और इस बार भी मैं चुपचाप उसके पीछे हो लिया। आप पिछली बार भाग क्यों गई थी? आप हल्दी की गांठों से क्यों डरती हो? अगर जंगल घूमना चाहते हो तो चुपचाप मेरे साथ चलते रहो। इस तरफ मुखिया जी भी अपनी पत्नी के साथ कमरे में बैठे थे। अरे आप कब तक ऐसे जागते रहेंगे? सो जाइए ना। नहीं आज मुझे नींद नहीं आएगी। तुम्हारी जान खतरे में है। ठीक है मेरे पतिदेव। मैं भी देखती हूं। अब कब तक मेरे लिए जागते रहते हैं। इस तरफ मैं कुंड के सामने बैठ चुका था। अब तुम अपनी आंखें बंद कर लो। उसके कहने पर मैंने मेरी आंखें बंद की।

और फिर उसने मेरे कंधों पर हाथ रखकर मंत्र पढ़े। काफी देर तक मंत्र पढ़ने के बाद वह मुझसे अलग हुई। अब तुम आंखें खोल सकते हो। मैंने आंख खोली तो पाया कि सामने एक मटका रखा हुआ है। इस मटके को उठाओ और मेरे साथ आओ। लेकिन आपने तो कहा था कि विधि करने के बाद मैं झरने पर जा सकता हूं और पेड़ों पर भी चढ़ सकता हूं। वो तो तुम कर सकते हो रोहन। लेकिन इसके पहले तुमको मेरा एक काम करना पड़ेगा। मैं तुम्हारे लिए इतना कर रही हूं। क्या तुम मेरा काम नहीं करोगे? यह सुनकर अब मुझे थोड़ा सुकून मिला। यही तो मैं जानना चाहता था। ऐसा कौन सा काम है जिसके लिए वो मुझे आवाजें लगाया करती थी। कौन सा काम था

जिसके लिए उसने सिर्फ मुझे चुना? मैंने मटका उठाया और उसके साथ हो लिया। अब वो मुझे अंधेरे जंगल की तरफ ले जाने लगी। मैं भी उसके पीछे चुपचाप चल रहा था और कुछ कदम ही चलने के बाद मैंने देखा कि वो कुआं ठीक हमारे सामने है। कुएं के पास पहुंचकर उसने मटकी को कुएं की बाउंड्री पर रखा।

क्या मुझे यहां पानी भरवाने लाई हो? सब पता चल जाएगा। अभी तुम अपनी आंखें बंद करो। उसके कहने पर मैंने झट से अपनी आंखें बंद कर ली। दूसरी तरफ ठाकुरन आराम से मुखिया जी के पास सो रही थी। मुखिया जी की भी अब आंख लग गई थी। तभी उसकी ओढ़ी हुई चादर अपने आप खिसकने लगी। उसके बाद किसी ने जोरों से ठुराइन का पैर खींचा। उसकी आवाज सुनकर मुखिया जी नींद से जागे। ठाकुरन मुखिया ने जल्दी से अलमारी से एक माला उठाई जो हल्दी की गांठों की बनी थी।

ठकुराइन अपने आप घसीटते हुए घर से बाहर निकली। मुखिया उसके पीछे भाग रहा था। वो जंगल के अंदर पहुंचने ही वाली थी। इसके पहले ही मुखिया ने उसके हाथ को पकड़ा और झट से उसके गले में माला डाल दी। तभी एक आवाज फिजा में गूंजी। तुम ठीक तो हो? जी मैं ठीक हूं। मुखिया ठकुराइन को फिर से घर ले गया। अब तुम अपनी आंखें खोल सकते हो। मैंने मेरी आंखें खोली। तो उस मटके का मुंह कपड़े से ढका हुआ था।

हां। उठाओ इसे और मेरे साथ चलो। इस बार तुमको आगे चलना है। रास्ता मैं बताऊंगी। मैंने उस मटकी को उठाया जो काफी भारी लग रही थी और उसके बताए रास्ते पर आगे बढ़ने लगा। काफी देर चलने के बाद मैं एक गुफा पर पहुंचा। इसके [संगीत] अंदर चलो। गुफा के अंदर जाने पर मुझे बहुत ठंड लग रही थी। मेरी रफ्तार जब भी हल्की होती तो वो मुझे टोकते हुए तेज चलने को कहती। इसी तरह चलते हुए मैं एक जगह पहुंचा। जहां जमीन पर पांच गोल घेरे बने थे। इसे एक घेरे में ये मटकी रख दो। मैंने उस मटकी को घेरे में रख दिया।

और फिर वो मुझे गुफा के बाहर ले आई। अब मैं तुमको उस इलाके में ले चलती हूं। अब तुम झरने में नहा भी सकते हो और पेड़ों से फल भी तोड़ कर खा सकते हो।

और इस पर मैंने खुश होने का नाटक किया। वो मुझे झरने पर ले गई। जहां मैंने खूब मौज मस्ती की। पेड़ों पर चढ़कर मैंने फल भी खाए। उसे यह दिखाने के लिए कि मैं सिर्फ एक भोला भाला हूं। लेकिन असल में मेरे दिमाग में वो सवाल गूंज रहा था। मेरे हाथों उस मटकी को गुफा के अंदर रखवाने के पीछे उसकी क्या वजह थी?

और यह काम वो किसी और से भी तो करवा सकती थी। कुछ देर ऐसे ही मस्ती करने के बाद मैंने उससे विदा ली और घर पहुंचा। अब इसी तरह से रोजाना वो मुझे बुलाती और एक घेरे में एक मटकी रखवाती। अब तीन रातें पूरी हो गई थी और तीन मटके गुफा में पहुंचाए जा चुके थे।

मेरे मन में अब यह जानने की जिज्ञासा थी कि उन मटकों में ऐसा क्या होता है। जो वो मुझे नहीं बताती। अपनी आंखें बंद कर लो। उस रात मैंने मेरी सिर्फ एक ही आंख बंद की जो उसकी तरफ थी और दूसरी खोली रखी। उसने मंत्र पढ़ना शुरू किया और तब मैंने एक बेहद डरावना दृश्य देखा।

आज रात मटके को उठाते हुए मुझे अजीब सा डर लग रहा था।

लेकिन मैंने उसे जाहिर नहीं होने दिया। उस मटके को गुफा में पहुंचाने के बाद अब मैं फिर से घर पहुंचा। लेकिन अब मुझे कुछ भी छिपाना ठीक नहीं लग रहा था। दादा जी मुझे आपको कुछ बताना है।

क्या हुआ रोहन? बताओ क्या बताना चाहते हो? मैंने दादा जी को अब आवाजों से लेकर सारी बात कह सुनाई। जिसे सुनकर दादा जी ने मुझे एक थप्पड़ लगाया। तुमको पता भी नहीं है कि तुमने गांव वालों को किस मुसीबत में फंसा दिया है। दादा जी ने मुखिया को खबर पहुंचाई और मुखिया जी ने अब उन्हीं महान तांत्रिक को बुलाया। वह कुर्सी पर विराजमान थे और मैं किसी मुजरिम की तरह उनके सामने खड़ा था।

जिज्ञासा जिस जिज्ञासा के चलते तुमने यह गलती की है

वो कोई छोटी गलती नहीं है। रोहन बेटा मुझे अपना बाजू दिखाओ। यह सुनकर मैंने कमीज ऊपर करके अपना बाजू उन्हें दिखाया। मेरे बाजू पर एक छोटा सा काला निशान था जो पैदाइशी था।

मंजरी को हमने बुरी तरह मारपीट कर गांव से निकाल दिया था। लेकिन उसे काली विद्या आती थी। इसीलिए उसने किसी तरह से अपने आप को बचा लिया था। लेकिन अब हल्दी की गांठे उस पर भी अभिशाप हो चुकी थी। मतलब हल्दी की गांठों से अब मंजरी को भी दूर रहने की जरूरत थी। और कुएं के शैतान से अब उसने सौदा किया था। मंजरी अब तक कई इंसान है इस कुएं में समा लिए हैं।

और अब तुम जाओ तो अपनी शक्तियां बढ़ाने के लिए और मुझे इस कुएं से आजाद कराने के लिए एक विधि कर सकती हो। कैसी विधि देव? तुमको वो बच्चा ढूंढना है जिसके बाजू पर एक काला निशान है।

उस बच्चे के जरिए तुमको एक विधि करनी है। उस विधि का तरीका यह है

तुमको उस बच्चे को किसी भी तरह कुएं पर लेकर आना है। उस बच्चे के हाथों उस गुफा में लेकर जाना है जहां तुम अपनी तंत्र विद्या करती हो। तो एक महामंत्र पढ़ने के बाद तुम्हारे और मेरे ऊपर से हल्दी की गांठों का अभिशाप भर जाएगा और फिर हम दोनों और शक्तिशाली हो जाएंगे। यह गांव वाले फिर हमसे किसी भी तरह से बच नहीं पाएंगे। [हंसी] मैं ऐसा जरूर करूंगी देव। जरूर करूंगी। ये सुनकर सभी गांव वाले हैरान रह गए।

और मेरा तो मानो खून ही जम गया था। इसका मतलब उसने मेरे जरिए अपनी आधी से ज्यादा विद्या को पूरी कर लिया है। हां, लेकिन घबराने की जरूरत नहीं है। तुम अभी भी अपनी गलती सुधार सकते हो। तांत्रिक बाबा मुझे कुटिया में ले गए और मुझे अकेले में कुछ समझाया। उस रात मैं फिर से मंजरी के पास पहुंचा। आज बस आखिरी रात है। आज तुमको मेरा यह काम आखिरी बार करना है।

और उसके बाद तुम आजाद हो। फिर तुम कभी भी जंगल आ सकते हो। तुमको मेरा काम करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। मुझे बहुत खुशी है कि मैं आपके काम आ सका। उस रात भी मैं हाथ में मटके लिए गुफा में पहुंचा। मैंने आखिरी पांचवें घेरे में मटके को रखा और जमीन पर बैठ गया। उसके बाद वह जमीन पर बैठी और आंखें बंद करके मंत्रों का जाप करने लगी। हां, यही सही मौका है।

मैं अपनी जगह से उठा और मटका उठाकर गुफा के बाहर फेंक दिया।

ऐसा करने से ना जाने उसे क्या दर्द हुआ। वो चीखती हुई अपनी जगह से उठ गई। ये क्या कर रहा है तू? मैंने जल्दी से बाकी मटके भी उठाए और गुफा के बाहर फेंक दिए। उसने अपना लबादा उतार फेंका। और मैंने पहली बार उसका चेहरा देखा। गुस्से की वजह से मानो उसकी आंखों में अंगारे दहक रहे थे।

वो मुझ पर झपकी। इस हाथापाही में उसके बाल खुल गए और मैं उसे धक्का देकर बाहर भागा। नहीं बचेगा तू, नहीं बचेगा। वो मेरे पीछे भागी। मैं एक बरगद के पेड़ के नीचे पहुंचा।

वहां पर मैंने जमीन से एक हल्दी की गांठ निकाली और उसे उठा लिया।

और वहीं रुक जाओ। मेरे हाथ में हल्दी की गांठ देखकर वो वहीं रुक गई और हैरानी से मुझे देखने लगी। अब मुझे वो दृश्य याद आया जब मैं बाबा के साथ कुटिया में गया था। जिस तरह वो शैतान हल्दी की गांठों से डरता है, उसी तरह मंजरी भी हल्दी की गांठों से डरती है। उन मटों को वो खुद नहीं छू सकती। उन्हें सिर्फ तुम ही छू सकते हो। ऐसे में तुम ही हो जो उसे उसके इरादों में कामयाब होने से रोक सकते हो।

बाबा मैं करूंगा। मैं उस गुफा के अंदर जाकर अभी उन मटकियों को बाहर निकाल देता हूं। नहीं रोहन ऐसा नहीं करना। उन मटकियों को गुफा में रखने का और बाहर निकालने का मुहूर्त सिर्फ मध्य रात्रि का ही है। उस समय वह भी तुम्हारे साथ होगी। ऐसे में तुम एक काम कर सकते हो। तुमको बहुत चालाकी से काम लेना होगा। मैं दिन में गुफा के अंदर तो नहीं आ सकता लेकिन एक काम कर सकता था।

मैं हल्दी की गांठ लिए दिन में यहां आया और मैंने इस बरगद के पेड़ के नीचे ये हल्दी की गांठ छिपा दी। इसके बाद मेरा यहां आना और मटकियों को गुफा से बाहर निकालना।

वो सब मेरे प्लान का हिस्सा था। अब तुम मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। फिलहाल तो मैं जा रही हूं लेकिन मैं तुझसे बदला जरूर लूंगी। नहीं छोडूंगी तुझे। यह कहकर वो बिजली की रफ्तार से वहां से चली गई और उसके जाते ही। उसी रात एक शख्स हाथ में लालटेन लिए काला लबादा पहने हुए कुएं पर पहुंचा। उसने अपनी जेब से एक चीज निकालकर कुएं में डाल दी। और फिर लालटेन को कुएं में फेंक कर वहां से भाग निकला। मैं गांव पहुंचा। और मैंने पूरी घटना उन्हें कह सुनाई। रोहन बेटा तुमने बहुत बहादुरी वाला काम किया है।

अब वादा करो कि कभी जंगल नहीं जाओगे लेकिन अभी खतरा टला नहीं है। मंजरी जिंदा है और कुएं का शैतान भी। इस पर मैं मुस्कुराया और बोला तांत्रिक बाबा मैं चाहता हूं कि आप सभी मेरे साथ कल रात कुएं पर चलें। यह सुनकर सभी हैरान रह गए। ये क्या कह रहे हो तुम रोहन? दादा जी बस एक बार मेरी बात मान लीजिए। मुझे आप सभी को कुछ दिखाना है। ठीक है रोहन बेटा। तुम हमें जो भी दिखाना चाहते हो हम जरूर देखेंगे।

लेकिन कुएं के करीब कोई नहीं जाएगा। अगली रात सभी गांव वाले मेरे साथ जंगल पहुंचे और सभी कुएं के इर्दगिर्द खड़े हो गए। कुएं के अंदर से अजीब सा धुआं निकला लेकिन काफी लोग थे इसलिए कोई भी डर कर नहीं भागा। उस समय मंजरी गुफा के अंदर कुंड के सामने बैठी हुई मंत्र उच्चारण कर रही थी। तभी जोरों की हवा चली और कुंड की आग बुझ गई। ये क्या हुआ? तभी किसी अदृश्य शक्ति ने उसका पैर खींचा और वो घसीटने लगी।

आ ये क्या कर रहे हैं आप मेरे देव? मंजरी बुरी तरह से घसीट रही थी। गांव के सभी लोग कुएं के पास खड़े थे। उन्होंने मंजरी को कुएं की तरफ आते देखा तो हैरान रह गए।

अरे हे ये तो मंजरी है। मंजरी ने कुएं पर आकर बाउंड्री को कस कर पकड़ लिया। मंजरी आंटी कल रात आप जब मेरा गला दबा रही थी तो मैंने आपके कान की बाली उतार ली थी

और फिर कल ही मैंने उस बाली को कुएं के अंदर डालकर अपनी ख्वाहिश मांगी कि कुएं का शैतान आपको अपने अंदर खींच ले और उसके बाद यह कुआं हमेशा के लिए शैतान से मुक्त हो जाए। यह सुनकर मंजरी के साथ सभी गांव वाले भी हैरान रह गए। मंजरी चीखते हुए कुएं के अंदर जा गिरी और फिर चारों तरफ सन्नाटा छा गया।

पर तभी कुएं के अंदर से काला धुआं निकल कर ऊपर आसमान में चला गया। रोहन बेटा तुमने पूरे गांव को खतरे से बचा लिया। पूरे गांव को तुम बहुत बहादुर हो। मुझे तुम पर गर्व है बेटा। दादा जी ने फक्र से मुझे गले लगा लिया।

और फिर सभी गांव वाले अब बहुत खुश थे क्योंकि उस रात के बाद से कुएं का खौफ हमेशा के लिए खत्म हो गया।

और यह कहानी यही समाप्त होती है और और आपको यह कहानी केसी लगी कोमेंट में जरुर बताएं और कहानी ईसी तरह कि भूतिया कहानी पढ़ने के लिए बने रहे हमारी वेबसाइट Www.JaryNews.com पर और इस कहानी को ज्यादा से ज्यादा सेयर जरुर करे धन्यवाद।

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