Rahasyamay Kuan 2 Horror Story | New Hindi Horror Stories 2026 | Jary News

Rahasyamay Kuan 2 Horror Story | New Hindi Horror Stories 2026 | Jary News


रात होते ही मुझे फिर से वही आवाज सुनाई दी।

तो मैंने इधर-उधर देखा तो मेरे दोनों तरफ दादा-दादी आराम से सोए हुए थे। आज तो मुझे देखना ही पड़ेगा कि यह आवाज किसकी है। कौन है जो मुझे जंगल घुमाना चाहती है।

मैं खाट से उठा और दबे पांव बाहर निकल गया। कुछ कदम चलने के बाद भी आसपास कोई नहीं दिखा। कौन है? आप सामने क्यों नहीं आती? सिर्फ मेरा नाम पुकारती रहती हैं। मेरी आवाज सुनकर पहरा देने वाला एक आदमी मेरी तरफ आया। कौन है वहां? रुको। उसकी आवाज सुनकर मैं जल्दी से एक पेड़ के पीछे छिप गया। वो आदमी अपने हाथ में पकड़ी हल्दी की गांठ को ऊपर उठाए।

और इस तरह से आगे बढ़ रहा था जैसे कि वो उसका सुरक्षा कवच हो। ये गांव के लोग इतना अजीब बर्ताव क्यों कर रहे हैं और दादाजी मुझसे क्या छिपा रहे हैं

कुछ समझ नहीं आ रहा।

उस आदमी के जाने के बाद मैं जंगल की तरफ रवाना हो गया। रास्ता सुनसान था। और काफी डरावना। लेकिन इस समय मेरे मन में जो सवाल उठ रहे थे उसको जानने के लिए मुझे हिम्मत रखना बहुत जरूरी था। अब जंगल मेरे ठीक सामने था। मैंने कदमों को रोका और उस जंगल को देखने लगा जिसमें काले अंधेरे में चमकते जुगनुओं की रोशनी काफी दिलचस्प लग रही थी। अगर आप मुझे जंगल दिखाना चाहती हैं

तो सामने आना पड़ेगा। वरना मैं जा रहा हूं।

दादी जी :- अरे नहीं नहीं रोहन मैं आ रही हूं। रुको।

मैंने देखा एक औरत काला लबादा पहने हुए मुझे हाथ के इशारे से उसके पास बुला रही है। इस औरत के हाथ में भी एक लालटेन था और उसका चेहरा पूरी तरह से ढका हुआ था। मैं उसके पास पहुंचा। मेरे साथ आओ रोहन। वो आगे बढ़ने लगी और मैं भी उसके पीछे हो लिया। आपने अपना चेहरा क्यों छिपाया हुआ है?

अगर आप शक्ल दिखा देती तो इस पर वो कुछ नहीं बोली। मैं उसके साथ-साथ आगे बढ़ रहा था। और अब मुझे जंगल का एक अलग ही नजारा दिखाई दिया।

वो जंगल का बहुत ही खूबसूरत हिस्सा था। वहां चारों तरफ घने पेड़ थे। जमीन पर छोटे-छोटे पौधे उगे हुए थे जिन पर खूबसूरत फूल लगे थे और यहां की जमीन बहुत साफ सुथरी थी। सामने ही एक झरना भी बह रहा था। अरे वाह, इतना प्यारा जंगल मुझे तो यकीन ही नहीं होता। पता नहीं क्यों दादा जी मुझे यहां आने नहीं देते थे। यह कहकर मैं झरने की तरफ दौड़ा। लेकिन तभी मुझे एक झटका सा लगा और दूर जा गिरा।

दादी जी :- अरे रोहन मैं तो तुमको बताना ही भूल गई। क्या बताना भूल गई आप? मैं उस झरने तक क्यों नहीं पहुंच पाया? यह जंगल का सबसे पवित्र इलाका है। इसमें जाने के लिए हमें पवित्र होने के लिए एक विधि करनी पड़ती है। और अगर कोई उस विधि को किए बिना यहां आने की कोशिश करता है तो उसको ऐसे ही झटके लगते हैं। यही यहां का रहस्य है। तुम अकेले यहां आते और तुम्हारे साथ यह होता तो तुमको यही लगता कि यहां जरूर कोई भूत है। इसीलिए तुम्हारे दादाजी तुमको यहां नहीं आने देते। लेकिन अब मैं तुमको वो विधि करवाऊंगी और उसके बाद तुम जिस पेड़ पर चढ़ना चाहो चढ़ सकते हो। फल खा सकते हो। झरने में नहा भी सकते हो।

में :- ठीक है। मैं उस विधि को करने के लिए तैयार हूं।

दादी जी :- आओ मेरे साथ।

अब वो मुझे एक जगह ले गई। यह जगह बहुत अंधेरा था। बीच में कुंड जल रहा था। आसपास जादू टोने का सामान पड़ा हुआ था और काला खरगोश भी वहां बैठा था।

दादी जी :- इधर बैठ जाओ रोहन।

अब मैं वो विधि शुरू करती हूं। उसके कहने पर मैं नीचे बैठ गया। उसने कोई मंत्र पढ़ा। फिर उसने मेरे कंधों पर हाथ रखा और मंत्र पढ़ने लगी। ओम भीम क्लीम काली मुंडाय विच्छे। मैं चुपचाप वहां बैठा था। तभी अचानक से वो चीखते हुए मुझसे दूर हो गई। क्या हुआ आपको?

हल्दी की गांठ, हल्दी की गांठ। ये कहकर वो वहां से भाग गई और मैं हैरान रह गया। हल्दी की गांठ। उसने ऐसा क्यों बोला? मुझे अब कुछ समझ में नहीं आया।

मैं घर की तरफ भागा और चुपचाप जाकर अपनी खाट पर लेट गया। लेकिन मेरे मन में अभी भी सवाल उठ रहा था कि उसने हल्दी की गांठ का नाम क्यों लिया? इत्तेफाक से उसी समय मुझे मेरी जेब में कुछ महसूस हुआ। मैंने जेब में हाथ डाल कर देखा तो मेरी जेब में एक हल्दी की गांठ थी। ये कहां से आई? इस घटना से मेरे मन में अब एक और सवाल उठ गया कि अब इस हल्दी की गांठ का क्या रहस्य है

और वो औरत गांठ की वजह से मुझे क्यों छोड़ भागी और अगर वो कह रही थी कि जंगल के उस इलाके में जाने के लिए पवित्र होना पड़ता है तो क्या गांव में सब अपवित्र है? उसी रात गांव के घर में एक अधेड़ उम्र दंपत्ति आपस में बातें कर रहे थे। मंगू ताया और नंदिनी ताई मेरा चश्मा आखिर कहां गया? तुमने उसे अभी तक नहीं ढूंढा। जी, मैंने तो आपका चश्मा धोकर आपके खाट के पास ही रखा था।

आपने ही उसे खो दिया है।

तुम जवानी में भी लापरवाह थी और अब भी लापरवाह ही हो। उसी समय गांव की गलियों से कोई गुजर रहा था। उसने अपने आप को चादर से पूरी तरह से ढका हुआ था। वो चुपके से मंगूताया के घर के दरवाजे पर गया और उसने उस पर टंगा मटका उतार कर एक तरफ फेंक दिया।

मंगूताया ने अभी आंखें बंद ही की थी। तभी तूफानी हवा चलने लगी और उनकी चारपाई अपने आप हवा में ऊपर उठ गई। जब उन्हें ज्यादा ठंड लगने लगी तो उन्होंने आंख खोली और अपने आप को हवा में पाकर उनका दिल दहल उठा। अरे अरे बचाओ मुझे कोई वो जोरों से चिल्लाए लेकिन उनकी आवाज किसी तक नहीं पहुंची। घाट अपने आप गोलगोल घूमने लगी। अरे कोई बचाओ मुझे।

मैं यह कैसे आ गया? खाट गोल-गोल घूमने लगी। और अब उनको बुरी तरह से चक्कर आ गए। वो बेहोश हुए और फिर से घाट पर ही ढेर हो गए। उनके बेहोश होते ही घाट अपने आप जमीन पर आ गई। उन्होंने खुद को आंगन में पाया। उस समय ताई झाड़ू लगा रही थी।

नंदिनी तुमको पता है कल रात हमारे साथ क्या हुआ? क्या होता? आप चश्मे के खो जाने से मुझसे नाराज हुए और यहां बरामदे में आकर सो गए। वो नहीं। जब मैं सो रहा था तो मेरी खाट अपने आप हवा में ऊपर उठ गई और गोल-गोल घूमने लगी। क्या? हां वो इतनी तेज घूमी कि मुझे चक्कर आ गए। [हंसी] आपने जरूर कोई सपना देखा है। अगर ऐसा होता ना तो अब तक तो आप विदेश पहुंच गए होते।

यहां बरामदे में क्यों मिलते? मंगूताया से इस पर कोई जवाब नहीं निकला। लेकिन उनको यकीन था कि उनके साथ जरूर कुछ तो हुआ है। शाम ढलने पर मेरे मन में फिर से वही सवाल उठ रहा था कि मेरी जेब में हल्दी की गांठ कहां से आई और मैं फिर से घर से निकल पड़ा। उस तरफ मंगू ताया भी कुछ बेचैन हो रहे थे। नंदिनी जरा मुझे पानी लाकर दो। अब प्यास लगी है भाई। अरे यहां आइए जरा।

बाल्टी उठाने में मेरी मदद कीजिए।

मैं उस समय मेरे घर पर बैठा था और खिड़की से मुझे नंदिनी ताया हाथी के नल के पास खड़ी नजर आई। अरे तुम हो कहां भाई? मैं यहां हूं हाथी के नल के पास। जल्दी आइए। नंदिनी की आवाज सुनकर ताया घर से निकले। और हाथी के नल पर पहुंचे।

उन्होने पाया कि नंदिनी ताया एक बाल्टी लिए हुए खड़ी है। तुमसे यह बाल्टी नहीं उठती। इसे तो तुम रोजाना अकेले ही घर ले आती हो।

यह सुनकर नंदिनी ताई ने कोई जवाब नहीं दिया।

उसकी आंखें अचानक से लाल-लाल चमक उठी और उसके चेहरे पर गुस्सा उभर आया। क्या हुआ नंदिनी? उन्होंने ताया का पैर पकड़ा और उनको जंगल की तरफ घसीट ले गई। श

ये देखकर मुझे बहुत अजीब लगा लेकिन मैं चुपचाप अपनी आंखें बंद करके सो गया। नंदिनी बहुत तेज भाग रही थी। ताया की घिसटते हुए हालत खराब हुए जा रही थी। बिजली की रफ्तार से नंदिनी कुएं के पास जाकर रुकी। नंदिनी, तुम मुझे यह कहां ले आई? कुएं को सामने देखकर मंगू ताया का दिमाग घूम गया। उन्होंने नंदिनी की तरफ देखा तो देखते ही देखते वो भयानक शैतान में तब्दील हो गई।

उसने ताया को पकड़ा और उन्हें कुएं के अंदर ले गया।

सुबह हुई तो गांव में डर का माहौल छा गया। सभी ताया के अचानक गायब हो जाने से परेशान थे और ताई रोए जा रही थी। नंदिनी ताई हमें बताओ तो सही कि ताया को आपने आखिरी बार कहां देखा था? कल उन्होंने मुझसे पानी मांगा था। मैंने मटके से पानी लिया और उनको देने के लिए बाहर पहुंची तो वो बरामदे में थे ही नहीं। यह सुनकर मुझे बहुत अजीब लगा। ताई आप झूठ क्यों बोल रही हो?

क्या मतलब है तुम्हारा? ताई क्यों झूठ बोलेंगी? दादा जी कल शाम मैंने बरामदे में देखा था कि ताई ह्थी के नल से पानी भर रही थी। उसके बाद ताया भी वहां आए और फिर ताई ताया का हाथ पकड़ कर जंगल में ले गई। हे भगवान यह तो अनर्थ हो गया। मेरे मुंह से यह बात सुनने के बाद किसी ने भी ताई से कोई सवाल नहीं किया बल्कि सब के सब डर गए। क्या तुम्हारे घर के बाहर मटका टंगा है?

तभी एक आदमी ने घर की चौखट पर जाकर देखा तो वहां कोई मटका नहीं था। जरूर वही उन्हें ले गया है। अब मेरे मन में उठ रहे सवालों की हद पार हो गई थी।

और मैंने अब दादा जी से गरज कर कहा। दादा जी आप लोग इतना क्यों डर रहे हैं? मुझे कुछ बताइए तो सही। इस गांव में आखिर चल क्या रहा है? क्यों कोई जंगल नहीं जाना चाहता? क्यों हम लोग अपने घर के बाहर मटकियां लटकाते हैं? और क्यों रमेश चाचा के बजने पर सब उनकी बीवी से नाराज थे? और अब मंगू ताया के गायब होने के बाद आप लोग क्यों ताई से कुछ पूछते नहीं कि वो उन्हें कहां ले गई थी और मटकी के बारे में बात कर रहे हैं? बेटा वो ताई नहीं थी। ताई तो उस समय अपने घर में थी। तो कौन थी वो? नहीं मुखिया जी इसे मत बताइए। यह अभी बच्चा है। महेश बाबू अब हमें रोहन को सब कुछ बताना ही पड़ेगा।

वरना यह खुद पता लगाने पर आ गया तो इसकी जान को खतरा हो सकता है। इस पर दादा जी चुप हो गए। रोहन बेटा हमारा गांव पहले बहुत खुशहाल था और उस दिन हमारी खुशियों को किसी की नजर लग गई। गांव के एक आदमी ने देखा कि इस गांव की एक विधवा औरत मंजरी कुएं के पास बैठे हुए कोई मंत्र विद्या कर रही है। मंजरी रोजाना जंगल जाती और फिर कुएं के पास बैठकर ना जाने कौन सा जादू टोना किया करती। उसकी इस हरकत से हम सभी हैरान थे। धीरे-धीरे यह बात पूरे गांव में फैल गई।

मुखिया जी वो मंजरी ना जाने कुएं के पास बैठकर कौन सी तंत्र विद्या करती है। हमें तो वो औरत बिल्कुल भी ठीक नहीं लग रही। अगर यह बात है तो हम उस मंजरी से बात करके देखते हैं। वही बताएगी कि ऐसा वो क्या करती है। हम सभी इकट्ठा होकर मंजरी के पास पहुंचे।

मंजरी तुम यह क्या करती रहती हो? बताओ हमें। मुखिया जी मैं जो कुछ भी कर रही हूं इस गांव की भलाई के लिए कर रही हूं। क्या मतलब है तुम्हारा? ऐसा क्या कर रही हो तुम? मैंने काले जादू में महारत हासिल की है और अपनी तंत्र विद्या की शक्ति से ही मैंने एक शैतान को इस कुएं के अंदर सिद्ध किया है। जब भी गांव के किसी आदमी पर मुसीबत आएगी तो वह इस कुएं पर आकर अपनी इच्छा मांग सकता है

और वो पूरी भी होगी। कुएं में शैतान यह सुनकर सभी डर गए। मंजरी हमें कुछ भी समझ में नहीं आ रहा। एक शैतान भला हमारी इच्छा पूरी क्यों करेगा? सरपंच जी वो जरूर करेंगे। उनसे इच्छा पूरी करवाने की एक छोटी सी विधि है। हमें सबसे पहले किसी भी इंसान की एक चीज लेनी है।

उसके बाद काले लिबास में हाथ में लालटेन लिए इस कुएं पर आना है। फिर हमें अपनी इच्छा मांगनी है। उसके बाद जो चीज हम लेकर आए हैं उसे इस कुएं में डाल देना है।

और उसके बाद वो जलता हुआ लालटेन भी कुएं में फेंक देना है। उसके बाद अंधेरे में ही यहां से चले जाना है। ऐसा करने के बाद कुछ ही दिनों में जिस इंसान की चीज हमने इस कुएं में फेंकी थी, शैतान उसे इस कुएं में खींच लेगा और हमारी इच्छा पूरी हो जाएगी।

ये सुनकर हम सभी की हैरानी का कोई ठिकाना नहीं था। या क्या? मतलब हम अपनी इच्छा पूरी करने के लिए किसी की जान का सौदा करें।

सरपंच जी जिस इंसान ने हमें नुकसान पहुंचाया हो हम उसको खत्म करने के लिए इसका इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसा करने से हमारा बदला भी पूरा हो जाएगा और फिर हमारी ख्वाहिश भी पूरी हो जाएगी। उसकी बात सुनकर मुझे यह ठीक नहीं लगा। हमने उसी समय मंजरी को गांव से निकाल दिया और फिर वो यहां कभी नजर नहीं आई। तो उसके बाद क्या हुआ? आप लोग इस तरह डर में क्यों जी रहे हैं?

उसके बाद गांव के लोगों ने छिपकर उस कुएं का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। ऐसा करने से एक आदमी की ख्वाहिश पूरी होती और एक कोई यह कुआं अपने अंदर खींच लेता। बदले की भावना से लोग इसका फायदा उठा रहे थे। लेकिन यह गांव के लिए भारी नुकसान था।

इसलिए इस गांव के शैतान को निकालने के लिए हमने एक महातांत्रिक को बुलाया। इस कुएं को मैं बंद तो नहीं कर सकता लेकिन एक तरकीब बता सकता हूं

और जिससे इससे बचाव हो सकता है। बताइए बाबा इस कुएं के अंदर बसा शैतान अपनी शक्तियों का इस्तेमाल उस इंसान पर नहीं कर सकता जिसके आसपास हल्दी की गांठे हो। इसलिए जब भी तुम लोगों को इससे अपना बचाव करना हो तो तुम लोग अपने घर की चौखट पर हल्दी की गांठों से भरी एक मटकी टांग दिया करना। जब तक वो मटकी टंगी रहेगी तब तक वो तुमको नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। इसके बाद हमने ऐसा ही करना शुरू किया। जब भी हमें पता चलता कि कोई उस कुएं के पास अपनी ख्वाहिश मांगने गया था

तो हम हल्दी की गांठे मटकी में भर के घर के बाहर टांग देते। और कुछ आदमी अपनी जेबों में हल्दी की गांठे रखकर रात में पहरा भी देते। रमेश के बच जाने पर हमने इसी वजह से उसकी बीवी चंद्रावती को बुरा भला कहा था क्योंकि हमें पता चल गया था कि उसने रमेश को ठीक करने के लिए कुएं की मदद ली है। इसलिए उसी रात से हम लोग अपने आप को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहे थे।

रोहन बेटा तुम कहीं अकेले ही जंगल ना पहुंच जाओ। इसीलिए मैंने तुम्हारी जेब में हल्दी की गांठ रखी थी। अब मुझे सब कुछ समझ आ गया था। काला लबादे पहने हुए वो औरत कोई और नहीं बल्कि रमेश की बीवी ही थी। क्योंकि मैंने जिसे देखा था उसने कुएं में चश्मा ही फेंका था

और अब मुझे यह भी समझ आ गया था कि हल्दी की गांठों का क्या रहस्य था। अब मेरे सभी सवालों का जवाब मुझे मिल गया था।

लेकिन एक सवाल अभी भी बाकी था कि जो औरत मुझे रातों को आवाजें देती है वो कौन है? वो इस गांव के किसी और बच्चे को आवाज क्यों नहीं देती?

क्या मेरा भी इस कहानी से संबंध है या फिर उसका कोई और ही उद्देश्य है? तभी एक आदमी वहां भागा-भागा आया। मुखिया जी अनर्थ हो गया। क्या हुआ? आपकी पत्नी अपनी पत्नी का नाम सुनते ही मुखिया जी के पैरों तले जमीन निकल गई। वो आदमी मुखिया जी को क्या खबर दी? वो औरत कौन है?


Horror Story Next Part :- Rahasyamay Kuan 3 Horror Story

Post a Comment

0 Comments